2024 में सूडान के लाल सागर राज्य के इब्राहिम बलाल स्कूल में माता-पिता और देखभालकर्ता बच्चों का जन्म दर्ज कराने सुबह से कतार में लगे। विस्थापित माँ राशा अपनी दो बेटियों के लिए आईं। यूनिसेफ बताता है कि युद्ध में पहचान-पत्र खोने वाले परिवारों के लिए जन्म प्रमाणपत्र शिक्षा, स्वास्थ्य और खाद्य सहायता का प्रवेशद्वार है।

चार महीने के अभियान ने न्यायाधीश सहित पंजीकरण दल मौके पर रखे। अदालत और पारिवारिक गवाहों वाली प्रक्रिया तीन से पाँच दिन की रह गई। अकेले स्कूल में रोज़ सौ से अधिक बच्चे दर्ज हुए।

यह कतार युद्ध की क्षति को प्रेरक कहानी न बनाए। यह विस्थापन में खोए आधिकारिक अस्तित्व-प्रमाण को परिवारों द्वारा मामला-दर-मामला वापस पाने का व्यवस्थित प्रयास था।