सूडान–चाड सीमा के पास मेतचे शिविर में पानी की कतार भोर से सूर्यास्त तक चलती थी। वहाँ लगभग 40,000 शरणार्थी रहते थे, पर सहायता संस्थाओं के पास बोरवेल खोदने के लिए धन नहीं था और पानी की पुरानी कमी थी। शौचालय, कंबल और मच्छरदानियाँ भी कम थीं। यह एक नल की खराबी से बड़ी समस्या थी। 2023 में संयुक्त राष्ट्र ने 33.9 करोड़ लोगों की सहायता के लिए 51.5 अरब डॉलर माँगे, पर 38.6% ही मिला। राहत धन 2022 के 30 अरब से 2023 में 21 अरब डॉलर से थोड़ा अधिक रह गया। दिनभर की कतार ने दूर की वित्तीय कमी को डिब्बों के पास प्रतीक्षा के घंटों में बदल दिया।