गिनी-बिसाऊ में मोबाइल जन्म-पंजीकरण कार्यक्रम स्कूलों तक पहुँचा, जहाँ शिक्षक ने हाज़िरी लेकर माता-पिता और बच्चों की कतार व्यवस्थित की। यूनिसेफ ने लंबी पंक्ति में एक युवा दंपति को अपने एक वर्षीय बच्चे का नाम तय करते देखा। सात वर्ष तक पंजीकरण निःशुल्क है, फिर भी दूरस्थ समुदायों में दूरी और खर्च इसे टालते रहे हैं।

स्कूल अभियान हर परिवार को अलग नागरिक कार्यालय भेजने के बजाय पात्र परिवारों को एक जगह जुटाता है। कक्षा सूची केवल शैक्षिक रिकॉर्ड नहीं रहती; वह बिना कानूनी दस्तावेज़ वाले बच्चों को पहचानकर प्रक्रिया को क्रम देती है।

कतार एक प्रमाणपत्र के लिए थी, पर उसका असर स्कूल, स्वास्थ्य और भविष्य के सरकारी काम तक जाता है। कानूनी पहचान का रास्ता कार्यालय नहीं, कक्षा से शुरू हुआ।